१. जून का महीना
२. सफर की शुरुआत

Youngsters is a Hindi blog which provides interesting real stories.





हेलो गाइज आपसे दुबारा मिलकर बहुत ख़ुशी हुई। आशा करता हूँ आप सब खुश और सुरक्षित होंगे। मेरे न्यू ब्लॉग मैं आपका स्वागत हैं वेलकम टू माय न्यू ब्लॉग।🙏 आज मैं आपको लेके चलूँगा कुछ ऐसे सफर पे जिसे मैं तो आज तक भूल नहीं पाया और मुझे लगता हैं अगर आप भी इसे पढ़ेंगे तो भूल नहीं पायंगे। 😋
![]() |
तो सड़क को पीछे छोड़ते छोड़ते हम पोहचते हैं पोंटा साहिब जहाँ से शुआत होती पहाड़ो की , वो हरियाली भरे रोड दुनिया की इस चेचाहत से दुर् शांति मैं😜 , वो गरजते बादल ठंडी ठंडी हवाइये तो उस मौसम का मजा लेने के लिए हम रुके पोटा साहेब के खाली रास्तो पे जहाँ हमने थोड़ी बहुत पिक्स ली जो हर कोई करता हैं इन् हंसी पलो को बाद मैं याद करने के लिए।
पर मेने बताया हमारे लिए कोनसे हंसी पल एक तो स्कूटी पे तीन लोग और उप्पर से हमारी समस्याएं जो पीछा नहीं छोड़ रही थी। तो अब हम आगे बढ़ते हैं घूमते हुए पोंटा सैहब की मार्किट और गुरुद्वारा और फिर हमरी समस्या की हम ट्रिपलिंग नहीं कर सकते स्कूटी पे तो इसका उपाए हमने ये निकला की एक बंदा पुलिस वालो ( मामा )😉 से बचने के लिए चौक पे उत्तरेगा। तो पोंटा साहिब मैं पार्थ बैठा था स्कूटी पे तो हर चौक पे वो उत्तरा और पेैदल चला बेचारा 😁
तो कुछ इस परकर हम पोंटा साहिब करते हैं पार और चलते हैं अपने अगले मंजिल देहरादून की तरफ मगर हमारी समस्याए। ..... 😅




फिर ये कॉलेज लाइफ हमे कुछ काण्ड करना सिखाती है जैसे गर्लफ्रेंड बनाना, बंक मरना और क्लास न लगाना रखेर ये सब होता है कॉलेज के अंदर, पर जो कॉलेज के भार हॉता है वो तो इससे भी खतरनाक होता है
मैं आपको बताने वाला था की लोग पिगी क्यों लेते है क्यूंकि वहा वार्डरन का डर नहीं होता और इस बिच हम सिख जाते है दारू और सिगग्रेट्स जो हमें उस टाइम जन्नत लगती है। इससे आप फॉलो मत करना ये सब कॉलेज लाइफ का हिंसा है जो अधिकतर लोग फॉलो करते है ओर ये मौज मस्ती ऐसे ही चलती रहती है।

और फिर आजाती है वो घडी जो हमारा कभी पिछा नहीं छोड़ती एक्साम्स जिसे हम एक हफ्ते पहले त्यार करते है। वैसे तो हम एग्जाम की तैयारी करते नहीं है पर जब करते है तो अच्छे से करते है। मगर पता नहीं क्या हाल है हमारे हम कितना ही पढ़ले एक सप्ली तो अणि ही है और ये सुप्प्प्ली का कोई पता नहीं होता ये कब क्लैर हो होसकताहै फाइनल ईयर तक या फिर उसके बाद भी फिर भी हम कुछ न कुछ करके ये एक्साम्स क्लियर क्र भी ले तो प्लेसमेंट मार देती है।
५. प्लेसमेंट

जब हम ये सपपली और एग्जाम के चक्क्र से बच बच कर फाइनल ईयर के बाद साँस लेने की सोचते है तब हमारे सामने आता है प्लेसमेंट का चक्कर जिसमे पहले तो एलिजिबिल्टी क्रिटिरैया हमसे मैच नहीं होता है हां अगर हो भी जाये तो ऐपटिटूड , इंग्लिश स्पीकिंग और करैक्टर मार लेता है।
अगर इसके बाद भी कोई निकल जाता है दस हजार पर मंथ और कुछ पहले ही रह लेते है किसी का बाबू का बिसनेस होता है और कोई करना चाहता है वरना कोई यूट्यूब और कोई मेरे जैसा ब्लॉगर बन जाता है।
तो ये था कुछ एक मेरी और आपकी कॉलेज लाइफ जिसमे हमे मजा, दुःख, प्रेम सब मिल जाता है ये कॉलेज लाइफ हर किसी को याद अती है आपको भी आएगी और अगर आप अभी जाओगे कॉलेज लाइफ मैं तो मेरी तरफ से आपको गुडलक।
धन्यवाद मुझे इतना टाइम देने के लिए अगर आपको मुझसे कुछ पूछना या फिर बात करनी है। तो कमेंट करो मुझे बाताओ आपको मेरी कॉलेज लाइफ कैसी लगी और इसमें आपको क्या अच्छा लगा।
हेलो गाइज आपसे दुबारा मिलकर बहुत ख़ुशी हुई। आशा करता हूँ आप सब खुश और सुरक्षित होंगे। मेरे न्यू ब्लॉग मैं आपका स्वागत हैं वेलकम टू माय न्...
Chaman NagarBlogging / Mechanical EngineerCopyrights @ Youngsters.com - Distributed By Copy Blogger Themes - Blogger Templates By Templateism